आज की रात - एक जनाज़ा

आज एक बार को, एक दिन को रुक जाओ
आज एक बार सीने से लगा लो
और कहो कि मैं हूँ
आज जब दुनिया तितर बितर हो गई है
तो रुको
आज जब सपने, ख़्वाहिशें टूट कर गिरी हैं
तो रुको
आज जब सब धिक्कार चुके हैं
तुम अपना लो

आज एक बार को, एक दिन को रुको
आज एक बार सीने से लगा लो
और कहो कि मैं हूँ
आज जब आँसू रुक नहीं रहे
तो इन्हें मोती बना दो
आज उन सब से दूर मुझे
अपनी गोद में सुला लो

आज एक बार को, एक दिन को आख़िरी बार
आज एक बार को, एक दिन को झूठा ही सही
आज एक बार को मुझे वह झूठा प्यार दो
जिसे सच्चा मान मैं ख़ुशी-ख़ुशी मरूँ

तुम न आए, तुम्हारे इंतज़ार में
तुम न आए, मैंने रास्ते तके
तुम न आए और सब लमहे कट गए
तुम न आए और मैं लड़ी
उन आख़िरी साँसों से
तुम न आए, पर उम्मीद थी
और मैंने डोर न छोड़ी
तुम न आए और तुम्हारे इन्तज़ार में
मैंने हर पल जिया, हर पल मरी

अब आए ही हो तो रो भी दो
चलो सच्चे नही, झूठे आँसू ही टपका दो
अब आए हो तो याद कर लो
एक पल की सही, कमी तो महसूस करो
अब आए हो तो ज़रा देख भी लो
ख़ूबसूरती नहीं, लाचारी सही

अब आए हो तो इस अर्थी को हाथ लगा दो
अब आए हो तो इस जान को ठिकाने लगा दो
अब आए हो तो ख़ुद को और दुनिया को मुक्ति दिला दो
अब आए हो तो इस जनाज़े की शान बढ़ा दो

Comments

Jayantika said…
U in hindi??? kisi ki maari hai kya?? :P
sm serious thinkin...as i always say....!! wrds r simple n thats d beauty of poem writing ...turning simple words into beautiful feelings.....again a sad one frm u though!!! :-)
SR said…
too senti even by my standards! kabhi khush hoke bhi poem likh lo!!! and hindi mat likhna it becomes too tiring to read it.
Abhi said…
i liked it.....
tum hindi mein bhi likh sakti ho...little surprised... though a good one.... :) bt apni seriousness thodi kam karo...
Manish said…
Its simply OBSESSIVE! and MARVELLOUS!
Nothing else to say!
Unknown said…
आपने इस कविता में बहुत ही सहज तरीके से आधुनिक जीवन की विसंगतियों को समेट दिया है. आपकी कविता का शिल्प समकालीन हिंदी कविता के प्रारूप की है, (शायद आप इससे परिचित हों या ना भी हों) . शीर्षक कुछ खटक रहा था, या तो "आज की रात" होनी चाहिए थी या फिर "ज़नाज़ा" होना चाहिए था. कविता की आखिरी पंक्ति "आज आये हो तो इस ज़नाज़े की शान बढ़ा दो" आपकी पूरी कविता को आज के परिप्रेक्ष्य में काफी गंभीर बना देती है. कविता अच्छी है लेकिन मुझे ज्यादा अच्छा यह लगा कि आपने व्यावसायिक पाठ्यक्रम में होते हुए भी इस जैसी अच्छी कविता लिखी. अपनी रचनात्मकता को निरंतर बनाये रखें.
धन्यवाद